Bhagavad Gita Chapter 3

Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.41 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.41. Sanskrit तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ । पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ॥ ३.४१ ॥ Hindi इसलिये हे अर्जुन! तू पहले इन्द्रियों को वशमें करके इस ज्ञान और विज्ञानका नाश करनेवाले महान् पापी कामको अवश्य ही बलपूर्वक मार डाल| English The …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.26 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.26. Sanskrit न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम् । जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन् ॥ ३.२६ ॥ Hindi परमात्माके स्वरूपमें अटल स्थित हुए ज्ञानी पुरुषको चाहिये कि वह शास्त्रविहित कर्मोंमें आसक्तिवाले अज्ञानियोंकी बुद्धिमें भ्रम अर्थात् कर्मोंमें अश्रद्धा उत्पन्न न करे । किन्तु स्वयं …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.42 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.42. Sanskrit इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः । मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः ॥ ३.४२ ॥ Hindi इन्द्रियोंको स्थूल शरीरसे पर यानी श्रेष्ठ, बलवान् और सूक्ष्म कहते हैं; इन इन्द्रियोंसे पर मन है, मनसे भी पर बुद्धि है और …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.27 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.27. Sanskrit प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः । अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते ॥ ३.२७ ॥ Hindi वास्तवमें सम्पूर्ण कर्म सब प्रकारसे प्रकृतिके गुणोंद्वारा किये जाते हैं तो भी जिसका अन्तःकरण अहंकारसे मोहित हो रहा है, ऐसा अज्ञानी मैं कर्ता हूँ’ …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.28 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.28. Sanskrit तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयोः । गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते ॥ ३.२८ ॥ Hindi परन्तु हे महाबाहो ! गुणविभाग और कर्मविभाग के तत्त्व को जाननेवाला ज्ञानयोगी सम्पूर्ण गुण ही गुणोंमें बरत रहे हैं, ऐसा समझकर उनमें …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.29 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.29. Sanskrit प्रकृतेर्गुणसंमूढाः सज्जन्ते गुणकर्मसु । तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत् ॥ ३.२९ ॥ Hindi प्रकृतिके गुणोंसे अत्यन्त मोहित हुए मनुष्य गुणोंमें और कर्मोंमें आसक्त रहते हैं, उन पूर्णतया न समझनेवाले मन्दबुद्धि अज्ञानियोंको पूर्णतया जाननेवाला ज्ञानी विचलित न करे| English The …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.30 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.30. Sanskrit मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा । निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥ ३.३० ॥ Hindi मुझ अन्तर्यामी परमात्मामें लगे हुए चित्तद्वारा सम्पूर्ण कर्मोंको मुझमें अर्पण करके आशारहित, ममतारहित और सन्तापरहित होकर युद्ध कर| English Dedicate and surrender all your …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.31 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.31. Sanskrit ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः । श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभिः ॥ ३.३१ ॥ Hindi जो कोई मनुष्य दोषदृष्टिसे रहित और श्रद्धायुक्त होकर मेरे इस मतका सदा अनुसरण करते हैं, वे भी सम्पूर्ण कर्मोंसे छूट जाते हैं| English …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.32 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.32. Sanskrit ये त्वेतदभ्यसूयन्तो नानुतिष्ठन्ति मे मतम् । सर्वज्ञानविमूढांस्तान्विद्धि नष्टानचेतसः ॥ ३.३२ ॥ Hindi परन्तु जो मनुष्य मुझमें दोषारोपण करते हुए मेरे इस मतके अनुसार नहीं चलते हैं, उन मूर्खोको तू सम्पूर्ण ज्ञानोंमें मोहित और नष्ट हुए ही समझ| …

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Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 3.33 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Karma Yoga Chapter 3, Verse 3.33. Sanskrit सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि । प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति ॥ ३.३३ ॥ Hindi सभी प्राणी प्रकृतिको प्राप्त होते हैं अर्थात् अपने स्वभावके परवश हुए कर्म करते हैं। ज्ञानवान् भी अपनी प्रकृतिके अनुसार चेष्टा करता है। …

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