Bhagavad Gita Chapter 6

Bhagavad Gita Chapter 6, Verse 6.2 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Atma-Samyama Yoga Chapter 6, Verse 6.2. Sanskrit यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पाण्डव । न ह्यसंन्यस्तसंकल्पो योगी भवति कश्चन ॥ ६.२ ॥ Hindi हे अर्जुन ! जिसको संन्यास’ ऐसा कहते हैं, उसीको तू योग’ जान; क्योंकि संकल्पोंका त्याग न करनेवाला कोई भी पुरुष योगी …

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Bhagavad Gita Chapter 6, Verse 6.3 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Atma-Samyama Yoga Chapter 6, Verse 6.3. Sanskrit आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते । योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ॥ ६.३ ॥ Hindi योगमें आरूढ़ होनेकी इच्छावाले मननशील पुरुषके लिये योगकी प्राप्तिमें निष्कामभावसे कर्म करना ही हेतु कहा जाता है और योगारूढ़ हो जानेपर उस योगारूढ़ पुरुषका जो …

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Bhagavad Gita Chapter 6, Verse 6.4 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Atma-Samyama Yoga Chapter 6, Verse 6.4. Sanskrit यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते । सर्वसंकल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥ ६.४ ॥ Hindi जिस कालमें न तो इन्द्रियोंके भोगोंमें और न कर्मोंमें ही आसक्त होता है, उस कालमें सर्वसंकल्पोंका त्यागी पुरुष योगारूढ़ कहा जाता है| English When one …

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Bhagavad Gita Chapter 6, Verse 6.5 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Atma-Samyama Yoga Chapter 6, Verse 6.5. Sanskrit उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् । आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥ ६.५ ॥ Hindi अपने द्वारा अपना संसार- समुद्रसे उद्धार करे और अपनेको अधोगतिमें न डाले; क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु …

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Bhagavad Gita Chapter 6, Verse 6.6 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Atma-Samyama Yoga Chapter 6, Verse 6.6. Sanskrit बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः । अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ॥ ६.६ ॥ Hindi जिस जीवात्माद्वारा मन और इन्द्रियोंसहित शरीर जीता हुआ है, उस जीवात्माका तो वह आप ही मित्र है और जिसके द्वारा मन तथा इन्द्रियोंसहित शरीर नहीं …

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Bhagavad Gita Chapter 6, Verse 6.7 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Atma-Samyama Yoga Chapter 6, Verse 6.7. Sanskrit जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः । शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥ ६.७ ॥ Hindi सरदी गरमी और सुख दुःखादिमें तथा मान – – और अपमानमें जिसके अन्तःकरणकी वृत्तियाँ भलीभाँति शान्त हैं, ऐसे स्वाधीन आत्मावाले पुरुष ज्ञानमें सच्चिदानन्दघन परमात्मा सम्यक् …

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Bhagavad Gita Chapter 6, Verse 6.8 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Atma-Samyama Yoga Chapter 6, Verse 6.8. Sanskrit ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा कूटस्थो विजितेन्द्रियः । युक्त इत्युच्यते योगी समलोष्टाश्मकाञ्चनः ॥ ६.८ ॥ Hindi जिसका अन्तःकरण ज्ञान विज्ञानसे तृप्त है, – जिसकी स्थिति विकाररहित है, जिसकी इन्द्रियाँ भलीभाँति जीती हुई हैं और जिसके लिये मिट्टी, पत्थर और सुवर्ण समान …

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