Bhagavad Gita Chapter 2

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.68 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.68. Sanskrit तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः । इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ २.६८… Hindi इसलिये हे महाबाहो ! जिस पुरुषकी इन्द्रियाँ इन्द्रियोंके विषयोंसे सब प्रकार निग्रह की हुई हैं, उसीकी बुद्धि स्थिर है| English O ARJUNA, therefore with senses under …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.68 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.69 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.69. Sanskrit या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी । यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ॥ २.६९ ॥ Hindi सम्पूर्ण प्राणियोंके लिये जो रात्रिके समान है, उस नित्य ज्ञानस्वरूप परमानन्दकी प्राप्तिमें स्थितप्रज्ञ योगी जागता है और जिस नाशवान् …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.69 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.70 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.70. Sanskrit आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् । तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोत… Hindi जैसे नाना नदियोंके जल सब ओरसे परिपूर्ण, अचल प्रतिष्ठावाले समुद्रमें उसको विचलित न करते हुए ही समा जाते हैं वैसे ही सब भोग जिस स्थितप्रज्ञ …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.70 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.55 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.55. Sanskrit श्रीभगवानुवाच । प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्… Hindi  श्री भगवान्‌ बोले– हे अर्जुन! जिस काल में यह पुरुष मन में स्थित सम्पूर्ण कामनाओं को भलीभाँति त्याग देता है और आत्मा से आत्मा में ही संतुष्ट …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.55 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.71 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.71. Sanskrit विहाय कामान्यः सर्वान् पुमांश्चरति निःस्पृहः । निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति ॥ २.७१ ॥ Hindi जो पुरुष सम्पूर्ण कामनाओं को त्याग कर ममतारहित, अहंकाररहित और स्पृहारहित हुआ विचरता है, वही शांति को प्राप्त होता है अर्थात वह शान्ति …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.71 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.56 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.56. Sanskrit दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः । वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥ २.५६ ॥ Hindi  दुःखों की प्राप्ति होने पर जिसके मन में उद्वेग नहीं होता, सुखों की प्राप्ति में सर्वथा निःस्पृह है तथा जिसके राग, भय और क्रोध नष्ट हो गए …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.56 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.72 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.72. Sanskrit एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति । स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ॥… Hindi हे अर्जुन! यह ब्रह्मको प्राप्त हुए पुरुषकी स्थिति है, इसको प्राप्त होकर योगी कभी मोहित नहीं होता और अन्तकालमें भी इस ब्राह्मी स्थिति में स्थित …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.72 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.57 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.57. Sanskrit यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् । नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ २.५… Hindi जो पुरुष सर्वत्र स्नेहरहित हुआ उस-उस शुभ या अशुभ वस्तु को प्राप्त होकर न प्रसन्न होता है और न द्वेष करता है, उसकी बुद्धि …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.57 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.58 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.58. Sanskrit यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः । इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ २.५८… Hindi और कछुवा सब ओर से अपने अंगों को जैसे समेट लेता है, वैसे ही जब यह पुरुष इन्द्रियों के विषयों से इन्द्रियों को सब प्रकार …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.58 in Sanskrit, Hindi, English Read More »

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.59 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Sankhya Yoga Chapter 2, Verse 2.59. Sanskrit विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः । रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते ॥ २.५९ ॥ Hindi इन्द्रियों द्वारा विषयों को ग्रहण न करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, परन्तु उनमें रहने वाली आसक्ति …

Bhagavad Gita Chapter 2, Verse 2.59 in Sanskrit, Hindi, English Read More »