Bhagavad Gita Chapter 7

Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.22 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.22. Sanskrit स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान् ॥ ७.२२ ॥ Hindi वह पुरुष उस श्रद्धासे युक्त होकर उस देवताका पूजन करता है और उस देवतासे मेरे द्वारा ही विधान किये हुए उन इच्छित …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.23 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.23. Sanskrit अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् । देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि ॥ ७.२३ ॥ Hindi परन्तु उन अल्प बुद्धिवालोंका वह फल नाशवान् है तथा वे देवताओंको पूजनेवाले देवताओंको प्राप्त होते हैं और मेरे भक्त चाहे जैसे ही भजें, …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.24 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.24. Sanskrit अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः । परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम् ॥ ७.२४ ॥ Hindi बुद्धिहीन पुरुष मेरे अनुत्तम अविनाशी परम भावको न जानते हुए मन इन्द्रियोंसे परे मुझ – सच्चिदानन्दघन परमात्माको मनुष्यकी भाँति जन्मकर व्यक्तिभावको प्राप्त हुआ मानते हैं| …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.25 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.25. Sanskrit नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः । मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् ॥ ७.२५ ॥ Hindi अपनी योगमायासे छिपा हुआ मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता, इसलिये यह अज्ञानी जनसमुदाय मुझ जन्मरहित अविनाशी परमेश्वरको नहीं जानता अर्थात् मुझको जन्मने-मरनेवाला समझता है| …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.26 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.26. Sanskrit वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन । भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन ॥ ७.२६ ॥ Hindi हे अर्जुन ! पूर्वमें व्यतीत हुए और वर्तमानमें स्थित तथा आगे होनेवाले सब भूतोंको मैं जानता हूँ, परन्तु मुझको कोई …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.27 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.27. Sanskrit इच्छाद्वेषसमुत्थेन द्वन्द्वमोहेन भारत । सर्वभूतानि संमोहं सर्गे यान्ति परन्तप ॥ ७.२७ ॥ Hindi हे भरतवंशी अर्जुन ! संसारमें इच्छा और द्वेषसे उत्पन्न सुख-दुःखादि द्वन्द्वरूप मोहसे सम्पूर्ण प्राणी अत्यन्त अज्ञताको प्राप्त हो रहे हैं| English Arjuna, in this …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.28 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.28. Sanskrit येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् । ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ॥ ७.२८ ॥ Hindi परन्तु निष्कामभावसे श्रेष्ठ कर्मोंका आचरण करनेवाले जिन पुरुषोंका पाप नष्ट हो गया है, वे राग द्वेषजनित द्वन्द्वरूप मोहसे मुक्त दृढ़निश्चयी भक्त मुझको …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.29 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.29. Sanskrit जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये । ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् ॥ ७.२९ ॥ Hindi जो मेरे शरण होकर जरा और मरणसे छूटनेके लिये यत्न करते हैं, वे पुरुष उस ब्रह्मको, सम्पूर्ण अध्यात्मको, सम्पूर्ण कर्मको जानते हैं| …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.30 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.30. Sanskrit साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः । प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः ॥ ७.३० ॥ Hindi जो पुरुष अधिभूत और अधिदैवके सहित तथा अधियज्ञके सहित (सबका आत्मरूप) मुझे अन्तकालमें भी जानते हैं, वे युक्तचित्तवाले पुरुष मुझे जानते …

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Bhagavad Gita Chapter 7, Verse 7.4 in Sanskrit, Hindi, English

Here is the Sanskrit anuvad, Hindi anuvad, and English translation of Jnana-Vijnana Yoga Chapter 7, Verse 7.4. Sanskrit भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च । अहंकार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा ॥ ७.४ ॥ Hindi पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार भी — इस प्रकार यह आठ प्रकारसे विभाजित मेरी – प्रकृति है …

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